Friday, 04-09-2026
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दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे हाथ का फ्रैक्चर भी हुआ बेअसर, सागर ने लिखी अपराध जगत पर किताब

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टाइमलाइन न्यूज़ हिंदी के लिए चरन सिंह क रिपोर्ट

बरेली। विपरीत परिस्थितियों में भी कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किलें राह नहीं रोक सकतीं। इसका उदाहरण श्री गुलाब राय मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नैनीताल रोड ब्रांच के कक्षा 10 के छात्र सागर वैश ने पेश किया है। दाहिना हाथ फ्रैक्चर होने के बावजूद सागर ने महज 19 दिनों में अंग्रेजी भाषा में अपराध की वास्तविक घटनाओं पर आधारित पुस्तक ‘Crimeful Indie Days’ लिखकर उसे अमेजन पर प्रकाशित किया है।सागर ने पुस्तक लेखन की शुरुआत 5 जून 2026 को की और 24 जून को इसे प्रकाशित कर दिया। उन्होंने किसी प्रकाशक की मदद लेने के बजाय Amazon KDP (Kindle Direct Publishing) के माध्यम से स्वयं पुस्तक प्रकाशित की। इस दौरान उन्होंने लेखन के साथ शोध, संपादन, फॉर्मेटिंग, कवर डिजाइन और प्रकाशन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया भी खुद पूरी की।

दरअसल, हाथ में फ्रैक्चर होने के कारण सागर को छुट्टियों के दौरान घर पर रहना पड़ रहा था। शुरुआत में उन्हें लगा कि दूसरे लोग आगे बढ़ रहे हैं और वह पीछे छूट रहे हैं। इसी भावना को उन्होंने सकारात्मक दिशा दी और भारत में सामने आए विभिन्न अपराध मामलों के बारे में पढ़ना और शोध करना शुरू किया। एक मामले की जानकारी जुटाने के बाद दूसरे मामले के प्रति उनकी जिज्ञासा बढ़ती गई और देखते ही देखते उन्होंने 50 अलग-अलग अपराध मामलों को पुस्तक का रूप देने का निर्णय ले लिया।

सागर की बचपन से ही अपराध, रहस्यमय घटनाओं और कानून से जुड़ी दुनिया में रुचि रही है। अपराध आधारित कार्यक्रमों को देखने के साथ ही वह वास्तविक घटनाओं के पीछे छिपी परिस्थितियों को समझने में दिलचस्पी रखते हैं। इसी रुचि ने उन्हें भारतीय अपराध जगत से जुड़े मामलों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

पुस्तक को निर्धारित समय में पूरा करना सागर के लिए आसान नहीं था। फ्रैक्चर के कारण लगातार टाइपिंग करना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने काम जारी रखा और कई बार देर रात दो बजे या उसके बाद तक पुस्तक पर काम किया। मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने तय समय सीमा में अपनी पुस्तक पूरी कर प्रकाशित कर दी।


सागर के अनुसार, ‘Crimeful Indie Days’ उनके लिए महज एक पुस्तक नहीं, बल्कि जिज्ञासा, शोध, अनुशासन और धैर्य की यात्रा है। उनका मानना है कि परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, लक्ष्य के प्रति समर्पण और सीखने की इच्छा व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

सागर की उपलब्धि पर विद्यालय के प्रबंधक राजेश जौली और प्रधानाचार्य रणवीर सिंह रावत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने सागर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उसकी यह उपलब्धि विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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