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टाइमलाइन न्यूज़ हिंदी के लिए सूरज मौर्य की रिपोर्ट
बरेली-ऑनलाइन छात्र उपस्थिति अनिवार्य किए जाने पर शिक्षकों द्वारा शत प्रतिशत उपस्थिति न देने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक पत्र 29 अक्टूबर को जारी किया जिसमें सभी शिक्षकों का वेतन रोकने को वित्त एवं लेखाधिकारी को भेजा है, इसको लेकर शिक्षक भड़क गए और आज बी एस ए से बार्ता को आए, बी एस ए को न पाकर बात करने हेतु वरिष्ठ खण्ड शिक्षा अधिकारी दिनेश चंद्र जोशी आए और वार्ता की जो कि विफल हुई जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों ने वहीं बैठकर धरने का एलान किया, शिक्षक नेता जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार, युटा जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री शिखा अग्रवाल, महिला शिक्षक संघ की अध्यक्षा प्रवेश यादव सहित सभी ने जब तक वेतन नहीं तो घर नहीं जाएंगे और वहीं जमीन पर बैठ गए और बी एस ए को बुलाने की मांग करने लगे।

जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार ने कहा हम अपने वेतन के लिए आए हैं वेतन दे दे हम घर चले जाएंगे,
मांडलिक मंत्री के सी पटेल ने कहा कि समस्या मुख्य ये ही है कि शिक्षा अधिकारी छोटे हो या बड़े शिक्षक समस्याओं पर बात करना ही न चाहते हैं जिसका ही परिणाम है जो शिक्षक आज आपने वेतन को जमीन पर बैठने को मजबूर हुए हैं,
युटा जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने शिक्षक को और स्कूल को प्रयोग शाला बना दिया है आपने मूल कार्य से अन्य इतने कार्य दे दिए गए जिससे शिक्षक परेशान हो गया,
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि इतने सारे एप्प ने शिक्षकों को उलझा दिया है।महिला शिक्षक संघ की महामंत्री राखी सक्सेना ने कहा कि इस सत्र में पढ़ाई से ज्यादा ऑनलाइन ही ऑनलाइन और कुछ न,
शिक्षक नेता सी एल चौधरी ने कहा कि बात बात पर वेतन रोक दिया जाएगा, इनकी धमकी से तमाम शिक्षक हार्ट पैसेंट हो गए हैं, शिखा अग्रवाल ने कहा कि वेतन हमारे परिवार का है जिसे कोई भी न रोक सकता है, और न ही किसी भी जनपद में रुका है,
इस अवसर पर के सी पटेल, योगेश गंगवार, प्रेमपाल गंगवार, हरीश गंगवार,सूरज गंगवार, गिरवर सिंह, अनिल कुमार,रूपेंद्र राठौर,विजेंद्र सिंह, सिंकुल गंगवार, मुकेश गंगवार, देशबंधु,बलबीर सिंह, हेमंत मौर्य, पारुल चंद्रा, राजीव शर्मा, ऋषि पाल सिंह, अनिल कुमार सिंह, पुष्प राज सिंह, मनोज गंगवार , सतीश कुमार शर्मा, अरविन्द गुर्जर, वीरेंद्र उर्फ वीरू, राज पल्याल,प्रियंका भास्कर, सुधा देवी, तरण जीत, अन्न पूर्णा, विजेन्दर गुर्जर आदि सैकड़ों की संख्या में शिक्षक सम्मिलित रहे