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सूरज मौर्य टाइमलाइन न्यूज़ हिंदी संवाददाता
बरेली। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई में पीछे रह गए विद्यार्थियों को सीखने की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने कैच-अप शिक्षण पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत विद्यालयों में नियमित पुनरावृत्ति कराई जाएगी तथा प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त समय देकर विद्यार्थियों की सीखने की कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।शिक्षण प्रक्रिया में बच्चों के पूर्व ज्ञान और अनुभवों को आधार बनाकर पढ़ाई कराई जाएगी। टीचिंग-लर्निंग सामग्री (टीएलएम), प्रिंट सामग्री तथा शिक्षक डायरी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। पढ़ाई को सरल से जटिल की ओर ले जाने के साथ-साथ बच्चों की गलतियों का विश्लेषण कर उन्हें सकारात्मक सुझाव दिए जाएंगे। गलतियों को सीखने का अवसर मानते हुए विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षक 'मैं करूँ–हम करें–तुम करो' (GRR) रणनीति, सहपाठी शिक्षण (Peer Learning), जोड़ी में सीखना (Pair Learning), समूह आधारित शिक्षण (Cooperative Learning) तथा खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रयोग करेंगे, ताकि प्रत्येक बच्चा सहज वातावरण में सीख सके और कोई भी विद्यार्थी स्वयं को कमजोर महसूस न करे।कार्यक्रम की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए संकुल बैठकों, बेसलाइन एवं एंडलाइन आकलन, प्रत्येक विद्यार्थी की प्रगति का नियमित अभिलेखीकरण, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण पर विशेष बल दिया जाएगा। साथ ही अभिभावक-शिक्षक (पीटीएम) बैठकों में कैच-अप शिक्षण के उद्देश्यों और विद्यार्थियों की प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी।

इसी क्रम में मंगलवार को बरेली के क्यारा विकास क्षेत्र में खंड शिक्षा अधिकारी पूरन सिंह के निर्देशानुसार जोगीठेर न्याय पंचायत की संकुल बैठक का आयोजन प्राथमिक विद्यालय ऐना में किया गया। बैठक में न्याय पंचायत के सभी शिक्षक, शिक्षामित्र एवं अनुदेशक उपस्थित रहे।बैठक की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण से की गई। इसके बाद संकुल बैठक की औपचारिक कार्यवाही प्रारंभ हुई। विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने विभाग द्वारा निर्धारित एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की तथा कैच-अप शिक्षण योजना को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति तैयार की। बैठक में बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने, नियमित आकलन करने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने पर विशेष मंथन किया गया।

शिक्षकों ने संकल्प लिया कि कैच-अप शिक्षण योजना के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी तक प्रभावी शिक्षण पहुँचाया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा सीखने की प्रक्रिया में पीछे न रह जाए और सभी विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।